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जानिए गाजीपुर से क्या है गीतांजलि श्री का कनेक्शन, हाल ही में इनके हिंदी उपन्यास ‘टॉम्ब ऑफ सैंड’ को मिला है बुकर पुरस्कार

Know what is the connection of Gitanjali Shri to Ghazipur, recently his Hindi novel 'Tomb of Sand' has got the Booker Prize

द सर्जिकल न्यूज़ डेस्क : हाल ही में हिंदी उपन्यास में पहला बुकर पुरस्कार से जिस लेखिका का उपन्यास रेत समाधि (Tomb of Sand) को मिला है उस लेखिका गीतांजलि श्री का गाजीपुर से सम्बन्ध है.

अफ़सोस है कि मैं बचपन के बाद फिर गाजीपुर नहीं लौटी. अजीब सा रिश्ता है गाजीपुर से. उन्होंने अपने पिता जी की भी जिक्र किया. उन्होंने बताया कि उनके पिता जी अनिरुद्ध पाण्डेय पहले फ़ौज में रहे और फिर आईएएस बने. लेकिन गाजीपुर से उनका जुड़ाव रहा. उन्होंने भोजपुरी का भी जिक्र किया और कहा कि उनके उपन्यास में कोई न कोई व्यक्ति भोजपुरी में ही बात करता है.

गीतांजलि श्री के पिता जी अनिरुद्ध पाण्डेय गाजीपुर जनपद के मोहम्मदाबाद तहसील अंतर्गत गोडउर के रहने वाले थे. एक ऑनलाइन कवि सम्मलेन कार्यक्रम में उन्होंने इस कार्यक्रम का जिक्र किया था. उन्होंने इस कार्यक्रम में गाजीपुर के खान-पान का भी जिक्र किया था, भरवा अचार, बाटी-चोखा, ढूधी, मकुनी, राब पोस्ता आदि का भी जिक्र उन्होंने उस ऑनलाइन कवि सम्मेलन में किया था.

दिल्ली की लेखिका गीतांजलि श्री के हिन्दी उपन्यास ‘रेत समाधि’ (Tomb of Sand) को अंतरराष्ट्रीय बुकर प्राइज़ मिला है. ‘रेत समाधि’ प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय बुकर पुरस्कार जीतने वाला किसी भी भारतीय भाषा का पहला उपन्यास बन गया है. उनके उपन्यास को डेजी रॉकवेल ने अंग्रेज़ी में अनूदित किया है. यह 50,000 पाउंड के पुरस्कार के लिए चुने जाने वाला पहला हिन्दी भाषा का उपन्यास है. यह विश्व की उन 13 पुस्तकों में शामिल था, जिन्हें अंतरराष्ट्रीय बुकर पुरस्कार के लिए लिस्ट में शामिल किया गया था.

बुकर प्राइज ने एक ट्वीट में कहा, “गीतांजलि श्री और @shreedaisy को बधाई”. बंगाली लेखक अरुणावा सिन्हा ने ट्वीट किया कि “यस! अनुवादक डेज़ी रॉकवेल और लेखक गीतांजलि श्री ने ‘रेत समाधि’ के लिए अंतरराष्ट्रीय बुकर जीता. एक हिन्दी उपन्यास, एक भारतीय उपन्यास, एक दक्षिण एशियाई उपन्यास के लिए पहली जीत… बधाई!”

गीतांजलि श्री कई लघुकथाओं और उपन्यासों की लेखिका हैं. उनके 2000 के उपन्यास ‘माई’ को 2001 में क्रॉसवर्ड बुक अवार्ड के लिए चुना गया था. उन्होंने 50,000 पौंड का अपना पुरस्कार लिया और पुस्तक के अंग्रेजी अनुवादक, डेजी रॉकवेल के साथ इसे साझा किया.

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द सर्जिकल न्यूज़

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