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सरकार के निर्देश के बावजूद भी नहीं मिल रहा मनरेगा में काम- सर्वे

चकिया: वैश्विक महामारी कोरोना के चलते पूरा विश्व में आर्थिक मंदी से जूझ रहा है ऐसे में दिहाड़ी मजदूर, प्रवासी मजदूर, महिला एवं वन भूमि पर निवास करने वाले मजदूर इसका मार झेल रहे हैं देश में मार्च 2020 के बाद लगातार लॉकडाउन होने के कारण विभिन्न राज्यों से काम के अभाव में लौटे प्रवासी मजदूरों को उनके गांव में ही काम मिले इसके लिए सरकार द्वारा प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना लागू की गई परंतु जानकारी के अभाव से प्रवासी इस योजना से नहीं जुड़ पाए हैं और काम न मिलने के कारण पुनः शहरों की तरफ लौट रहे हैं.

इसके संबंध में मजदूरों की समस्याओं के आकलन के लिए ह्यूमन लिबर्टी नेटवर्क की पार्टनर संस्था मानव संसाधन एवं महिला विकास संस्थान व आजाद शक्ति अभियान द्वारा पूर्वी उत्तर प्रदेश के 4 जिलों वाराणसी, भदोही, चंदौली और मिर्जापुर के साथ ही 40 गांव में एफजीडी (फोकस ग्रुप डिस्कशन) किया गया. जिसमें कुल 27541 घरों को शामिल किया गया इस प्रक्रिया में60% दलित अनुसूचित जाति 30%फीसद अत्यंत पिछड़ा वर्ग जाति के लोग व 10% सामान्य जाति के लोग शामिल रहे हैं इस सर्वेक्षण से निम्नलिखित निष्कर्ष निकलकर आए:
1-मनरेगा में जॉब का प्रतिशत जॉब कार्ड धारकों की तुलना में कम पाया गया।केवल 35% मजदूरों को ही मनरेगा में काम मिला, जिसमें महिलाओं की भागीदारी में कमी पाया गया,
2-सर्वेक्षण में पाया गया कि पिछले 4 महीनों में अधिकतर प्रवासी मजदूर व गांव की मजदूर ने 30 दिन से अधिक काम नहीं किया है जबकि सरकार द्वारा लागू की गई योजना के अनुसार सभी को 125 दिन का काम मुहैया कराना था
3- अध्ययन में हमने पाया कि अधिकांश मामलों में मनरेगा के तहत कार्य विवरण व जॉब कार्ड में दर्ज नहीं है, यह देखा गया कि कार्य विवरण केवल 20% लोगों का जाब कार्ड पर दर्ज किए गए हैं जबकि शेष 80%के उत्तर दाताओं ने स्वीकार किया कि उन्होंने पिछले 4 महीने के दौरान काम किया है लेकिन जब का कोई भी विवरण नहीं मिला कुछ मामलों में मुसहर समुदाय के लोगों ने मनरेगा की मजदूरी के साथ गांव में निजी काम करने के लिए कहा गया जबकि दैनिक श्रम मजदूरी दर मनरेगा मजदूरी की तुलना में काफी अधिक है
4- 50% मजदूरों को प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना के बारे में जानकारी नहीं है और 30% प्रवासी ऐसे हैं जिनको गांव में काम न मिलने के कारण अब फिर से शहर की तरफ लौट रहे हैं,
5- मजदूरों को उनके काम के बदले में समय से मनरेगा में निर्धारित मजदूरी नहीं मिल रही है , पिछले चार महीना में केवल 25% प्रवासी मजदूरों का ही नया जॉब कार्ड बना है वह साथ ही साथ सर्वेक्षण के दौरान यह भी देखा गया कि 77% मजदूरों के पास ही उनका जॉब कार्ड है जबकि 22% मजदूरों का जाब कार्ड गांव के प्रधान और रोजगार सेवक अपने पास रखते हैं बेरोजगारी व मनरेगा में काम की अभाव के कारण 70% ऐसी समुदाय और 10% अन्य जाति समुदाय के लोगों ने अपनी आजीविका के लिए कर्ज लिया है कर्ज का औसतन प्रतिमाह 10% ब्याज के साथ प्रति परिवार 15000 से 20000 तक का है वह बहुत सारी परिवारों ने अपनी सारी जमा पूंजी खर्च कर दी है ज्यादातर मुसहर समुदाय के लोगों ने उस कर्ज को चुकाने के लिए कर्ज के बदले काम शुरू कर दिया है उनके पास आय कोई साधन न होने के कारण उनके बंधुआ स्थिति में फंसने का खतरा है। इस रिपोर्ट को जिला अधिकारी महोदय एवं डीसी मनरेगा को दिया गया है

इस अध्ययन का विश्लेषण व रोजगार के मुद्दे पर बात करते हुए ओम रेस्टोरेंट (आदित्य पुस्तकालय)में कचहरी रोड चकिया में बंधुआ मजदूर से मुक्त श्रमिकों के संगठन आजाद शक्ति अभियान के जिला संयोजक देवेंद्र कुमार ने कहा कि हालांकि सरकार ने मजदूरों को उनके गांव में ही रोजगार मुहैया कराने के लिए विभिन्न प्रयास कर रही है परंतु मनरेगा में काम से दलित व मुसहर समुदाय सबसे अधिक वंचित है सभी को मनरेगा में काम प्राप्त करने का अधिकार है अतः दलित व मुसहर समुदाय की हक के लिए आजाद शक्ति अभियान के सरकार से मांग की है
सरकार को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि रोजगार सेवक व ग्राम प्रधान गांव में लोगों से मनरेगा में काम की मांग के आवेदन को लिखित रूप से ले जिससे लाभार्थी को योजना में बेरोजगारी भत्ते के प्रावधान का लाभ मिल सके ,सरकार को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि जो पात्र लाभार्थी मनरेगा में काम की मांग कर रहे तो उन्हें दिशानिर्देश के तहत काम मिले मनरेगा व गरीब कल्याण विहार योजना के तहत गांव में जरूरतमंद व समस्या के मैपिंग के करने के लिए सरकार को डिस्ट्रिक्ट रूरल डेवलपमेंट एजेंसी व रोजगार सेवक को निर्देश जारी करना चाहिए, सरकार को प्राथमिकता के आधार पर यह सुनिश्चित करना चाहिए कि रोजगार दिवस पर एक सोशल ऑडिट अवश्य आयोजित किया जाए और इसके लिए रोजगार सेवक को जिम्मेवार बनाना चाहिए, मनरेगा नोडल अधिकारी को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि मनरेगा में कितने भुगतान है उसको प्राथमिकता के आधार पर भुगतान करना सुनिश्चित करें मनरेगा में संपूर्ण दिवस का कार्य दिया जाए वह मनरेगा में मजदूरी बाजार के अनुसार ही जाए साथ ही मुसर समुदाय के लोगों को 100% प्राथमिकता दी जाय। कार्यक्रम का संचालन मुकेश कुमार के द्वारा किया गया एवं इस अवसर पर गणेश प्रसाद विश्वकर्मा जितेंद्र कुमार अशोक कुमार उपस्थित रहे.

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