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शहीदे इमाम हुसैन और उनके 72 साथियों की याद में रात भर सीनाजनी और जंजीर का मातम होता रहा

एकरामुलहक की रिपोर्ट

शादियाबाद।आज शहीदाने कर्बला हजरत इमाम हुसैन राजी अल्लाह ताला की याद में जगह जगह ताजिया रख कर मातम और लकड़ियां खेल कर हजरत इमाम हुसैन की खेराजे अकीदत पेश की गई। मसउदपुर और अन्य कस्बों के लोग ताजिया उठा कर जंजीर और ब्लेड के साथ रात भर नौहा खानी वा मातम करते रहे।हर तरफ बस या हुसैन या हुसैन की सदा गुजती रही यू तो हर तेहवार खुशी का प्रतिक होता है लेकिन मोहर्रम एक ऐसा तेहवार है जो मोहम्मद साहब के नवासे हजरत इमाम हुसैन के शोक में मनाया जाता है हजरत इमाम हुसैन ने हक और बातिल के लिए कभी झुके नहीं हजरत इमाम हुसैन ने बताया की कितना भी बड़ा राजा महाराजा क्यू ना हो हक के लिए किसी के सामने झुकना नहीं चाहिए हजरत इमाम हुसैन ने मानवता की रक्षा के लिए अपने परिवार और दोस्तों की कुर्बानी दे दी मगर बातिल के सामने झुके नहीं इसी शहादत की याद में मुसलमान ताजिया शहीदों का प्रतीक माना जाता है।ताजिया के साथ जुलूस निकाल कर आज दस मोहर्रम को प्रतिकात्मक रूप से दफनाया गया इमाम हुसैन ने जुल्म और बाहुबल व वंशवाद के खिलाफ डट कर खड़े रहने की एक मिशाल पेश की इमाम हुसैन को झुकने के लिए यजीद ने बहुत जुल्म ढाया यजीद एक बहुत ही बड़ा अत्याचारी पापी शराबी और बलात्कारी था। यजीद अपने पिता माविया के मरने के बाद जबरदस्ती इस्लाम का खलीफा अपने आप को घोषित कर देता है।वह चाहता था की इमाम हुसैन अगर उसके साथ आगए तो इस्लाम उसकी मुट्ठी में आजाएगा इसी लिए जबरदस्ती इमाम हुसैन को कर्बला के मैदान में उनके 72 साथियों के साथ घेर लिया और बहुत जुल्म किया तीन दिनों तक पानी बंद कर दिया दरयाये फुरात पर पहरा लगा दिया ताकि कोई पानी न पी पाए हर तरह से यजीद ने इमाम हुसैन को झुकने की कोशिश की यहां तक की उनके 6 माह के बच्चो को भी नही छोड़ा और तीर और नेजो से बच्चो को शहीद कर दिया।फिर भी इमाम हुसैन झुके नहीं और अपने सभी 72 साथियों के साथ हस्ते हस्ते कुर्बानियां दे दी मगर यजीद के जुल्म और अत्याचार के आगे झुके नहीं यही वजह है की चौदह सौ वर्ष से भी अधिक समय गुजर जाने के बाद भी जब भी जुल्म और बर्बरता के खिलाफ वंशवाद के खिलाफ खड़े होने की बात होती है।इमाम हुसैन का जिक्र किया जाता है तो इमाम हुसैन वा कर्बला की घटना से प्रेरणा ली जाती है इमाम हुसैन की याद में जंजीर का मातम और जुलूस निकाला गया सुबह 5 बजे सभी ताजिया को कर्बला पे ले जा कर पतेहा खानी कर के अपने अपने घरोंको चले गए।कही भी किसी प्रकार की कोई अनहोनी नहीं हुई देखने वालो का ताड़ा लगा रहा करीब 3 हजार से ज्यादा की भीड़ इकठ्ठा थी।हर तरह चाय नाश्ता का इंतजाम किया गया था ठेले कूचे पर काफी भीड़ देखी गई।

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