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रेप मामले में घोसी सांसद अतुल राय बाईज्जत बरी

 

गाजीपुर/ भांवरकोल। मऊ के घोसी लोकसभा से बसपा सांसद अतुल राय रेप के 3 साल पुराने मुकदमे से आज बरी हो गए। इस संबंध में वाराणसी की एम एल ए कोर्ट के विशेष न्यायाधीश सियाराम चौरसिया की अदालत ने आज अपना फैसला सुनाया। सांसद अतुल राय के एडवोकेट अनुज यादव ने बताया, “कोर्ट ने पाया कि पीड़िता की तरफ से पेश किए साक्ष्य विश्वसनीय नहीं हैं। साक्ष्य की फोरेंसिक जांच भी हुई। उसकी रिपोर्ट से भी पुष्टि हुई कि सांसद को गलत तरीके से फंसाया गया था। कोर्ट ने हमारे मुवक्किल को बरी कर दिया है।” अतुल के खिलाफ यह मुकदमा 1 मई 2019 को बलिया की रहने वाली पीड़िता ने वाराणसी के लंका थाने में दर्ज कराया था। वो वाराणसी के यूपी कॉलेज की पूर्व छात्रा थी। न्याय नहीं मिलने का आरोप लगाते हुए बीते साल अगस्त में रेप पीड़िता और उसके गवाह ने सुप्रीम कोर्ट के सामने खुद को आग लगा कर जान दे दी थी। एडवोकेट अनुज यादव ने बताया, “पीड़िता और गवाह की आत्महत्या के बाद एक और मुकदमा लखनऊ में लिखवाया गया था। जिसमें उन्हें आत्महत्या के लिए दुष्प्रेरित करने का आरोपी बनाया गया है। अब उस मुकदमे में भी सांसद की बेल के लिए प्रयास किया जाएगा।” 1 मई 2019 को पीड़िता ने अपनी तहरीर में लिखा था कि वाराणसी में पढ़ाई के दौरान अतुल राय से उसका परिचय हुआ। मार्च 2018 में अतुल उसे अपनी पत्नी से मिलवाने की बात कहकर चितईपुर स्थित फ्लैट में ले गए। मगर, वहां कोई नहीं था। उसी दौरान उन्होंने उसके साथ रेप किया। साथ ही उसकी फोटो खींची और वीडियो बना लिया था। रेप करने के बाद अतुल उसे ब्लैकमेल कर फिर रेप करने लगे। विरोध करने पर अतुल राय उसे जान से मारने के साथ ही उसके परिवार को देख लेने की धमकी देते थे। पुलिस मुकदमा दर्ज कर अतुल की तलाश शुरू की तो वह भूमिगत हो गए। लोकसभा चुनाव जीतने के बाद 22 जून 2019 को अतुल ने वाराणसी की कोर्ट में सरेंडर कर दिया था। तब से वह जेल में ही हैं। मौजूदा समय में वह प्रयागराज की नैनी सेंट्रल जेल में बंद हैं। गाजीपुर के भांवरकोल थाना के बीरपुर गांव के मूल निवासी अतुल राय वाराणसी के मंडुवाडीह थाने के हिस्ट्रीशीटर हैं। अतुल राय के खिलाफ साल 2009 से लेकर अब तक 27 से ज्यादा मुकदमे दर्ज हैं। वाराणसी में बीएससी की पढ़ाई के दौरान अतुल को क्राइम का ग्लैमर रास आने लगा। धीरे-धीरे अतुल का झुकाव पूर्व विधायक माफिया मुख्तार अंसारी की ओर बढ़ता चला गया। 2019 के लोकसभा चुनाव में घोसी से मुख्तार अपने बेटे अब्बास को बसपा का प्रत्याशी बनाना चाहते थे। मगर, अतुल ने मुख्तार को चित करते हुए 14 अप्रैल 2019 को बसपा का टिकट हासिल कर लिया था। इसे लेकर मुख्तार अंसारी और अतुल के बीच कभी न भर पाने वाली खाई खुद गई।

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