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पवित्र महीने में रमजान शरीफ के अंतिम अशरे की पांच रातों में एक रात लैलतुलकद्र कहलाती है

सेवराई। रहमत, बख्शीश और मगफिरत के पवित्र महीने में रमजान शरीफ के अंतिम अशरे की पांच रातों में एक रात लैलतुलकद्र कहलाती है, इस रात रोजेदार व इबादत गुजार सारी रात अल्लाह की इबादत करते हैं।

उलेमा कहते हैं कि शब – ए – कद्र अर्थात लैलतुलकद्र में रोजेदारों के सारे गुनाह माफ कर दिए जाते हैं और इंसान एक मासूम बच्चे की तरह पवित्र हो जाता है। रमजान शरीफ के अंतिम अशरे की रातों में 21, 23, 25, 27 और 29 की रात शब – ए – कद्र होती है। यह रात बड़ी अज़मत और खैर – ओ – बरकत वाली रात होती है। इन्हीं रातों में पवित्र ग्रंथ कुरआन मजीद अवतरित हुआ और इसी रात में आसमान से फरिश्ते भी जमीन पर भेजे गए। शब – ए – कद्र को अल्लाह ने हज़ार महीनों से बेहतर क़रार दिया है। मुस्लिम समुदाय के लोग इन पांच रातों में शब – ए – कद्र की तलाश करते हैं। शब – ए – कद्र की रात महिलाएं व पुरूष दोनों के लिए इबादत करना अनिवार्य होता है फिर भी इसमें महिलाएं अधिक भागीदारी करती हैं। दिन में रोजा रखकर सारा दिन घर के कामकाज में व्यस्त रहना, फिर सारी रात जागकर इबादत करना यह जज़्बा औरतों में ही नजर आता है। उम्मे सलमा, फरहनाज़, गुलनाज़, आरज़ू आदि महिलाएं कहती हैं कि शब – ए – कद्र की रात इबादत करने से दिली सुकून मिलता है, इस रात वातावरण में शांति होती।

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