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गोवंश के साथ ही जंगली जानवर भी किसानों के लिए बने सिरदर्द

सेवराई।निराश्रित गोवंश के साथ ही जंगली जानवर भी किसानों के लिए सिरदर्द बन गए हैं। रात में खेतों में इनका झुंड पहुंच कर फसलों को चट कर जा रहे हैं। वही दूसरी ओर किसान फसल बचाने के लिए रातभर जागकर खेतों में आवाज लगा रहे हैं। किसान अगर कहीं चूके तो पलक झपकते ही जंगली जानवर फसलें चट कर जा रहे हैं। गेहूं, मटर, प्याज व सब्जी की खेती करने वाले किसान इनसे परेशान हैं। नीलगाय और जंगली सूअर ठंड में चना, मटर के अलावा सब्जियों को भारी नुकसान पहुंचा रहे हैं।

 

सेवराई तहसील क्षेत्र के अमौरा, सायर, देवल, कुतुबपुर, मगरखाई, भतौरा एवं इसके आसपास सैकड़ों नीलगाय किसानों की परेशानी बढ़ा रहे हैं। कर्मनाशा नदी के तट पर खेतों में आलू, प्याज, बैंगन, टमाटर, गोभी आदि सब्जी बोई जाती है। इन फसलों को बचाने के लिए किसानों को कड़ी मशक्कत करनी पड़ रही है। कभी – कभी किसान जब सुबह उठकर खेतों में पहुंचते हैं तो उनकी फसल तहस – नहस हो चुकी होती है।

 

कड़ाके की ठंड में फसलों की सुरक्षा कर पाना किसानों के लिए मुश्किल साबित हो रहा है। सबसे ज्यादा समस्या कर्मनाशा के तटवर्ती गांवों में होती है। रात में निकले नीलगाय और सूअरों का झुंड आसपास के खेतों में फसल को चरने के साथ ही रौंद डालते हैं। हालांकि, किसान फसलों को बचाने के लिए खेतों के किनारे बाड़, बांस बल्ली और कपड़ा बांधते हैं, मगर यह प्रयास भी जंगली जानवरों को नहीं रोक पा रहा है।

 

 

फसल बचाने के लिए रातभर जागने की मजबूरी:-

सायर गांव निवासी अशोक यादव, राजेश यादव ने बताया कि दिन में निराश्रित गोवंश से फसल को बचाना पड़ता है और रात में जंगली जानवरों से। रातभर जागकर फसलों को बचाने के लिए आवाज लगाना पड़ता है। मशाल जलाकर जंगली जानवरों एवं वन सूअरों को भगाना पड़ता है। भतौरा गांव निवासी योगेंद्र नाथ राय, रामप्रताप यादव आदि ने बताया कि नीलगाय एवं वन सूअरों के कारण इलाके के सैकड़ों एकड़ में लगी फसल बर्बाद हो चुकी है। इससे निजात पाने का कोई उपाय नहीं सूझ रहा है।

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