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एम ए एच इंटर कॉलेज में ग्रीष्मकालीन सत्र में सजी सुरों की महफिल

 

रफ्ता-रफ्ता वो मेरी हस्ती का सावन हो गए———-
गाजीपुर।स्थानीय एम0ए0एच0 इण्टर कॉलेज में चल रहे ग्रीष्मकालीन शिविर 2022 के पांचवें दिन सोमवार को ‘गीत-डांस’ कार्यक्रम का आयोजन किया गया।इस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि जिला विद्यालय निरीक्षक डॉ0 ओ0पी0 राय, विशिष्ट अतिथि भारतीय मूल के दोहा (क़तर) निवासी व मशहूर ग़ज़ल-गो अब्दुल ख़ैर साहब, फसिहुज़्ज़मां साहब, तुफ़ैल अहमद साहब, ग़ुलाम साबिर साहब तथा सा रे गा मा प्रोग्राम में चैंपियन, सुपरस्टार सिंगर सोनी टीवी व ज़ी टीवी के मशहूर बाल कलाकार मु0 अहमद वारसी खां (13 वर्ष) व अलीशा वारसी (16 वर्ष) एवं देश के प्रसिद्ध तबला वादक दीपक जी थे।कार्यक्रम का आगा कॉलेज की छात्रा रिफ़त आलिया ने तिलावते क़ुरआन से व छात्र आलोक कुमार ने सूरह फ़ातिहा व नात पढ़कर तथा अजय बिन्द ने इस्तक़बालिया गीत पेश करते हुए किया। खुशुशी मेहमानों का स्वागत कॉलेज के प्रधानाचार्य मो खालिद अमीर, सहित शिक्षकों व छात्र-छात्राओं ने गुलपोशी करके किया।महफिल में बतौर मुख्य अतिथि डॉ0 ओ0पी0 राय ने कहा कि छात्र-छात्राओं को तराशने व निखारने की कला कुम्हार की तरह प्रथम तो अभिभावकों के साथ साथ अध्यापकों का भी है।जैसा कि इस शिविर में देखने को मिल रहा है। इस रंगा रंग प्रस्तुति में में देश-विदेश के मशहूर कलाकारों से महफ़िल जगमगा उठा।वरिष्ठ ग़ज़ल-गो जनाब अब्दुल ख़ैर साहब ने अपनी ग़ज़ल पेश करके महफ़िल में चार चांद लगा दिया तो वहीं जनाब फसीहुज़्ज़मां साहब ने अपनी आवाज़ से मशहूर पाकिस्तानी गजल गो जनाब मेहंदी हसन साहब की सुरों से सजी गजल “रफ्ता रफ्ता वो मेरी हस्ती के सावन हो गए, पहले जां फिर जाने जां फिर जाने जाना हो गए” सुना महफिल लूट लिए।वहीं जनाब ग़ुलाम साबिर साहब प्रधानाचार्य मु0 ख़ालिद अमीर रचित ग़ज़ल को स्वर देकर महफ़िल में जोश भर दिया।रही बात मशहूर बाल कलाकारों की तो अलीशा वारसी व मो0 अहमद वारसी ने अपनी प्रस्तुति से उपस्थित श्रोताओं का दिल जीता ही वहीं उपस्थित छात्र छात्राओं को आगे बढ़ने की नसीहत दी।अन्त में तशरीफ़ फरमा अतिथियों को धन्यवाद ज्ञापित करते हुए कॉलेज के प्राचार्य मो खालिद अमीर ने कहा कि नई शिक्षा नीति में यह तय किया गया है कि छात्र-छात्राओं की टैलेंट को पहचाना जाय और उसे प्रोत्साहित किया जाये। ज़रूरी नहीं कि सभी सिर्फ डॉक्टर एवं इंजीनियर ही बनें क्योंकि जिंदगी में कुछ कर गुजरने को बहुत से विकल्प बचे हैं। कार्यक्रम के सफलता में तस्नीम फ़ारूक़ी, मनोज कुमार यादव, सुनील कुमार प्रजापति, अमरजीत कुमार बिन्द, मु0 रफी, इश्तियाक हुसैन, अबुल कैश, मु0 कमाल, जावेद अंसारी, शहाबुद्दीन तैयब, विनोद सिंह यादव, शहाब शमीम, शाहजहां खां, आरिफ खां, मुर्शीद अली,मनोज कुमार आदि का योगदान रहा। संचालन कॉलेज के उर्दू शिक्षक डॉ0 लईक अहमद सिद्दीकी व हिंदी प्रवक्ता शम्स तबरेज़ खां ने संयुक्त रूप से किया।

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