गाजीपुरताजातरीन

विश्वकर्मा समाज किसी पार्टी का पिछलग्गू नहीं है- दिलीप शर्मा

गाजीपुर: शहर के रुई मंडी विश्वकर्मा मंदिर पर विश्वकर्मा समाज की एक बैठक आयोजित की गई। इस अवसर पर मोहम्मदाबाद के अध्यापक एवं समाजसेवी दिलीप शर्मा ने कहा कि विश्वकर्मा समाज किसी पार्टी का पिछलग्गू नहीं है।

यह समाज सृष्टिकर्ता भगवान विश्वकर्मा की वंशज है। हमारे समाज का बहुत ही गौरवशाली इतिहास रहा है। हम अपने आप में किसी पार्टी से बड़े और समाजवादी हैं और हम किसी के मोहताज नहीं है। हम आने वाले लोकसभा चुनाव में खुद की पार्टी बना कर स्वजातीय बंधुओं को सदन में भेजने का काम करेंगे ।हम जिसकी जितनी भागीदारी उसकी उतनी हिस्सेदारी के पैटर्न पर काम करेंगे । हमारे समाज को सभी पार्टियों के नेताओं ने अपमानित और उपेक्षित करने का काम किया है ।

मदन मोहन विश्वकर्मा ने कहा कि समाज पार्टी के संगठन से अलग होता है हम यदि सामाजिक स्तर से मजबूत रहेंगे तो दूसरे दलों के लोग भी हमें सम्मान और पद प्रतिष्ठा देंगे हमें घर-घर जाकर विश्वकर्मा जनों की समस्याओं को जानने की जरूरत है इससे हमारा सौहार्द और एकता बनेगी।

अध्यापक गंगा सागर विश्वकर्मा ने कहा कि हम अपने स्वाभिमान की रक्षा करते हुए संगठन को मजबूत करें संगठन में अपार शक्ति होती है। और शक्ति के बल पर हम शासन प्रशासन से कुछ भी करवा सकते हैं। इसलिए हमें एकजुट होने की जरूरत है।

इसी कड़ी में जनार्दन शर्मा ने कहा कि विश्वकर्मा समाज दाता होता है याचक नहीं इसलिए हमें दाता की जगह आदाता बनने की जरूरत है। हमें समाज के कुछ राजनीति और पार्टी से प्रेरित नेताओं से सावधान रहने की जरूरत है । जो अपने स्वार्थी सिद्धि के लिए समाज को पार्टी की ज्वाला में झोक देते हैं।

समाजसेवी तथा अध्यापक राघव शर्मा ने कहा कि संगठन में शक्ति होती है। उसकी शक्ति के बल पर संगठन फलता और फुलता है।विश्वकर्मा समाज किसी की सहानुभूति का मोहताज नहीं वह बड़ा ही स्वाभिमानी होता है। हमें समाज के संगठन में युवाओं को अधिक से अधिक जोड़ना चाहिए। साथ ही वृद्ध बुद्धिजीवियों के संपर्क में रहकर प्रेरणा लेनी चाहिए।

इसी कड़ी में ओमप्रकाश विश्वकर्मा ने कहा कि हम किसी के अनुचर नहीं हैं जो इशारे पर चलता है । एक विश्वकर्मा भगवान विश्वकर्मा के वंशज हैं समाज किसी भी तरह की उपेक्षा या अपमान कतई बर्दाश्त नहीं करेगा। आगामी चुनाव में हम अपनी शक्ति का एहसास कराएंगे।

और इस अवसर पर कार्यक्रम के अध्यक्ष रामावतार विश्वकर्मा को समाज की तरफ से अंगवस्त्रम देकर सम्मानित किया गया।साथ ही यह निवेदन किया गया कि आगामी आने वाले दिनों में विश्वकर्मा स्वाभिमान एवं एकता सम्मेलन तथा प्रतिभा सम्मान समारोह आयोजित किया जाएगा। जिसमें जिले तथा बाहर के सरकारी कर्मचारियों तथा अधिकारियों एवं प्रतिभावान छात्र- छात्राओं को सम्मानित किया जाएगा। इसमें अधिक से अधिक विश्वकर्मा जनों की उपस्थिति अपेक्षित की गई हैं।

वक्ताओं की कड़ी में चंद्रमा विश्वकर्मा,अंगद विश्वकर्मा जय मूरत विश्वकर्मा,विनोद विश्वकर्मा, बलराम विश्वकर्मा, रामधनी विश्वकर्मा,हरिओम विश्वकर्मा, विनोद विश्वकर्मा, मदन मोहन विश्वकर्मा, शिवम विश्वकर्मा, राधेश्याम वर्मा, मनु वर्मा, तानसे लाल विश्वकर्मा आदि रहे।

कार्यक्रम में मुख्य रूप से किशन विश्वकर्मा, शशिकांत विश्वकर्मा, अनिल विश्वकर्मा, बहादुर विश्वकर्मा, मुनीम विश्वकर्मा, अशोक विश्वकर्मा, अजय विश्वकर्मा, सिद्धि विश्वकर्मा, तुलसी विश्वकर्मा, नीरज विश्वकर्मा, चंद्रमा विश्वकर्मा, प्यारेलाल विश्वकर्मा, घनश्याम विश्वकर्मा, रामधनी विश्वकर्मा आदि लोग उपस्थित रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता साहित्यकार रामावतार विश्वकर्मा तथा संचालन नीरज विश्वकर्मा ने किया।

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