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पंचायत चुनाव में मंगरूवा से मुलाक़ात पार्ट-1

चन्दन शर्मा (द सर्जिकल न्यूज़): जैसे ही पंचायत चुनाव में प्रधानी की सीट कन्फर्म हो गया, मंगरूवा आज हमसे छोला वाला दुकान पर मिल गया,जहां हम छोला खा रहे थे। का करें हम दारू-वारू से दूर रहते हैं तो कभी-कभी छोला खा लिया करते हैं।

तो मंगरूवा जैसे ही हमसे मिला हम उसको देखे उ हमको देखा। हम तो समझ गए ओकरा हालत के। तभी हमरे मन में घच से एक सवाल आ गया कि पूछे कि का मंगरू अब चुनाव लड़ना है कि नाहीं? मुंह त मंगरूवा का लटका ही था।


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हम लपाक से पूछ लिए, “का मंगरू का हाल हौ?

मंगरू का मूंह तो पहिले से ही उतरा था। बोला मत पूछा मरदे, “का कहीं केकरा से कहीं?

हम बोले “देखो मंगरू हमसे त कह दो तुम काहे कि हम सुनेंगे तो कुछ कहेंगे नहीं कब्बो केहू से।”

तो मंगरू बोला, “का बताई चन्दन भैया हम त चुनाव लड़े के तैयारी में रहनी ही परधानी के लेकिन कुल गड़बड़ हो गइल ह।”

हम पूछे, “कहे भाई क्या हो गया?”

मंगरूवा बोला, ” कुल मेहनत बेकार हो गइल भैया हम सोवहले रही परधानी में लड़ब त जीत जाइब आ हमहूँ आपन घर दुवार पर खूब टाइल्स आ संगमरमर लगवा के चमका देइब लेकिन सिटीए आरक्षित हो गइल ह। ऊपर से जैसेही हमके लागल ह कि अब जीते के चांस बनत बा। तभी सीट दूसरे के पाले में चली गई। आ सबसे दिक्कत भैया ये हो गया कि हम तो पिछलका परधनवा के जांच डीएम साहब के यहां एप्लीकेशन दे के करवाये थे। अभी रिपोर्ट भी नहीं आया था। परधान हमको खर्चा भी देने के लिए राजी हो गया था लेकिन हम लिए नहीं। अब का बताए चन्दन भैया हम तो “लतवो से गए आ हथवो से” काहे कि ना ख़र्चवे ले पाए ना परधनिये लड़ पाए। ऊपर से परधान के साथ ही गांव के आदमियों के आपन एंटी बना लिये हम। आ हम तो सनक गए थे भैया हमरा माथा में गोबर घोरा गइल रहा कि हम जांच करवाये आज तक केवनो परधान जेल में गया ही नहीं। उल्टे घोटाला वाला परधान के देखनी त विधायक हो गइल।”

हम बोले “मंगरू तुम सही बोल रहे हो तुम्हरे दिमाग में सही में गोबर भर गया था। तू ई जांच वांच छोड़ दो अब आराम से रहो।”


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मंगरू बोला सही कह रहे हैं आप भैया ” हम झुट्ठे सनक गए थे सब हमको परधान कह रहे थे आ खूब खरचा करवा रहे थे। भैया अब तोहरा हम बताई दे रहे हैं ई जांच वांच के चक्कर से बढ़िया रहा रहता कि हम परचून के दुकान खोल लिए रहते काहे कि जितना हम खरचा किये हैं दौड़े-धूपे में उतने में दुकान त खुलिये गइल रहित, अच्छा भैया जै श्री राम।”

हम बोले- ” जै श्री राम नहीं मंगरू सीता राम, आ एक मंतर हमसे ले लो तुम्हे जिंदगी भर काम करेगा”

मंगरूवा बोला “का भैया?”

हम बोले, “सीताराम, सीताराम कहिये, आ जाहि विधि राखे राम ताहि विधि रहिये।”

इतना सुनकर अगली बार फिर मिलने का वादा करके मंगरूवा चला गया साइकिल पर सवार होकर घर।

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द सर्जिकल न्यूज़ डेस्क

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