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अखबार के लिए किये आवेदन पर कुंडली मारे बैठा है गाजीपुर प्रशासन, आरटीआई का जबाब भी दिया अजीबो-गरीब

Ghazipur administration is sitting on the horoscope on the application made for the newspaper, the answer of RTI has also been given strange-poor

गाजीपुर (चन्दन शर्मा): गाजीपुर जनपद में आरटीआई कानून का मखौल उड़ाया जा रहा है. यही नहीं सबसे बड़ी बात यह है कि यह मामला पत्रकारिता से भी जुड़ा हुआ है. यह मामला पत्रकारिता को कुचलने का भी है.

पत्रकारिता से इसलिए क्योंकि न्यूज़ पोर्टल thesurgicalnews.in के संचालक चन्दन शर्मा ने गाजीपुर जिलाधिकारी कार्यालय से आजिज होकर सूचना के अधिकार के अंतर्गत सूचना मांग ली. लेकिन सूचना के अधिकार अंतर्गत आवेदन को खूब घुमाया गया और जब उसका जबाब आया भी तो सभी बिन्दुओं पर उत्तर मिला शून्य.

क्या है पूरा मामला बताते हैं. चन्दन शर्मा ने वीकली अखबार के टाइटल वेरिफिकेशन के लिए ऑनलाइन आवेदन आरएनआई की वेबसाइट से प्रिंट कोड संख्या 2019111129 आवेदित किया. जिसे जिलाधिकारी के कार्यालय में जमा कर दिया लेकिन वह आवेदन कहाँ गया पता ही नहीं चला. अभी भी इसका स्टेटस डीएम कार्यालय में पेंडिंग ही दिखा रहा है.

उसके बाद पुनः 28 अप्रैल को चन्दन शर्मा ने एक और आवेदन किया जिसका प्रिंट क्रमांक 2022011227 है. इसे भी जिलाधिकारी कार्यालय में आरएनआई कार्यालय को फॉरवर्ड करने के लिए जमा कर दिया. लेकिन यह आवेदन भी फॉरवर्ड नहीं हुआ. जिसके बाद मजबूरन चन्दन शर्मा को आरटीआई से सूचना माँगनी पड़ी.

इस सम्बन्ध में पहले चन्दन शर्मा ने अपने स्थानीय कासिमाबाद तहसील अंतर्गत एसडीएम से सूचना के अधिकार के अंतर्गत आवेदन स्पीडपोस्ट द्वारा 19 अप्रैल 2022 को भेजा. इस सम्बन्ध में 5 बिन्दुओं पर सूचना माँगी गयी थी जिसका अभी तक कासिमाबाद एसडीएम कार्यालय से कोई भी जबाब नहीं मिला.

फिर तंग आकर चन्दन शर्मा ने ऑनलाइन आरटीआई पोर्टल का सहारा लिया और 29 मई 2022 को एक आरटीआई डीएम कार्यालय गाजीपुर को ऑनलाइन फाइल कर दी. जिसका क्रमांक DMOGP/R/2022/60092 है. अब इस आरटीआई का जबाब तो डीएम कार्यालय से मिल जाना चाहिए था. लेकिन यहाँ नियमों की अनदेखी कर दी गए और 36 दिनों तक लम्बा इन्तजार कराने के बाद 37वें दिन इस आवेदन को एसपी कार्यालय में फॉरवर्ड कर दिया गया. जबकि नियमानुसार इस आवेदन की सूचना इतने दिनों में मिल जानी चाहिए थी.

अब इस आवेदन का जबाब एसपी कार्यालय से क्या मिला देखिये. पहली तीन बिन्दुओं की तो जानकारी एसपी कार्यालय में नहीं है और इसका जबाब भी समझ आ रहा है. लेकिन नीचे की दो बिन्दुओं को पढ़िए


सवाल- आपके ऑफिस में आरएनआई टाइटल वेरिफिकेशन के लिए किस पटल पर आवेदन की हार्ड कॉपी दी जायें?

जबाब- उक्त बिन्दु के सम्बन्ध में कोई भी आवेदन मेरे पोर्टल पर नहीं है और सूचना शून्य है.

अगला सवाल- आरएनआई टाइटल वेरिफिकेशन फॉरवर्ड करने के लिए वर्तमान में कौन अधिकारी कार्यरत है उसका संपर्क सूत्र व पद की सूचना प्रदान करें.

जबाब- उक्त बिन्दु के सम्बन्ध में अभी तक ऐसा कोई भी आवेदन पत्र पोर्टल पर प्राप्त नहीं हुआ है सूचना शून्य है.


ऊपर के सवालों का जबाब आपको यदि कपिल शर्मा के शो का बाबा जी का ठुल्लू याद दिला दे तो कोई शक नहीं है. किस तरह से मजाक उड़ाया जा रहा है आरटीआई आवेदनों का यह आप ऊपर के जबाब से स्पष्ट समझ सकते हैं.

क्या है आरएनआई का आदेश?

2009 में आरएनआई के एक जारी लेटर के अनुसार इसमें कहा गया है कि प्रकाशकों ने डीएम कार्यालय में प्रकाशन शुरू करने की घोषणा को अग्रेषित करने में देरी की जा रही है. इस सम्बन्ध में गौर किया जाए और प्रकाशकों को परेशानियों का सामना न करना पड़े.

लेकिन आरएनआई के उक्त सुझाव को दरकिनार करने के साथ ही डीएम कार्यालय द्वारा आरटीआई कानून का भी मखौल उड़ाया गया है. इस सम्बन्ध में चन्दन शर्मा ने बताया है कि वह प्रथम अपील दर्ज कराएँगे.

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