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मार्कंडेय दुबे के देहदान के बाद सुपुत्र जारी रखेंगे अलख

गाजीपुर: प्राथमिक विद्यालय के शिक्षक रहे मार्कंडेय दुबे ने लगभग डेढ़ दशक पहले अपनी पत्नी लीलावती देवी के साथ काशी हिंदू विश्वविद्यालय के लिए देहदान का संकल्प लिया था।

तीन साल पहले लीलावती देवी के देहावसान होने पर उन्हें काशी हिंदू विश्वविद्यालय में मेडिकल के बच्चों को पढ़ने हेतु समर्पित कर दिया गया था।

वही 6 नवंबर को मार्कंडेय दुबे (Markandey Dubey) के निधन होने के उपरांत उनके दोनों पुत्र चंद्र भूषण दुबे एवं सामाजिक कार्यकर्ता ब्रज भूषण दुबे (Braj Bhushan Dubey) ने उन्हें महर्षि विश्वामित्र स्वशासी मेडिकल कॉलेज गाजीपुर के लिए समर्पित कर दिया। पति-पत्नी दोनों के देहदान से लोगों के बीच इस बात की चर्चा होने लगी कि परंपराओं को तोड़ना चाहिए।


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सिद्ध पीठ हथियाराम महामंडलेश्वर व पीठाधीश्वर स्वामी भवानी नंदन यति ने पीठ की परंपराओं को तोड़ते हुए उनके त्रयोदशाह पर गृह ग्राम यूसुफपुर क्षेत्र मनिहारी में पहुंचे और लोगों से कहा कि तब महर्षि दधीचि ने आसुरी शक्तियों के संहार हेतु अपना देह दान किया था।

वहीं आज के असुर कोविड, कैंसर, डायबिटीज, हृदय रोग, अस्थि रोग एवं शरीर के तमाम अंगों की पढ़ाई करने के लिए देहदान अंगदान और नेत्रदान की महती आवश्यकता है।

स्वामी भवानी नंदन यति ने जोर देकर कहा कि शरीर नश्वर है और कर्म अमर। श्रीमती लीलावती देवी व शिक्षक रहे मार्कंडेय दुबे (Markandey Dubey) अपना शरीर देश हित में दान कर अजर अमर हो गए। दोनों लोगों का शरीर मेडिकल के बच्चों की पढ़ाई हेतु काम आएगा।

महामंडलेश्वर यति ने कहा कि आदर्श शिक्षक रहे मारकंडेय दुबे ने न केवल अपना देह दान किया बल्कि आदर्श पक्ष का प्रस्तुतीकरण करते हुए अपनी पत्नी लीलावती का भी देहदान कराया। शायद देश का यह पहला मामला होगा कि पति-पत्नी दोनों ने अपने आप को दधीच की परंपरा से जोड़ते हुए मेडिकल के बच्चों पर बड़ा उपकार किया।


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सामाजिक कार्यकर्ता एवं मार्कंडेय दुबे (Markandey Dubey) के पुत्र ब्रज भूषण दुबे (Braj Bhushan Dubey) ने कहा कि उनके द्वारा अब तक सैकड़ों की संख्या में काशी हिंदू विश्वविद्यालय के लिए देह दान का फार्म भरा गया था। अब आगामी दिनों में समस्त देह दान महर्षि विश्वामित्र मेडिकल कॉलेज के लिए कराए जाएंगे। अब तक कुल 16 लोगों को आंखें दान करा कर जीवन ज्योति दी गई है।

आदर्श इंटर कॉलेज गाजीपुर के प्रधानाचार्य रहे विजय शंकर राय ने ब्रज भूषण दुबे (Braj Bhushan Dubey) सहित उनके पूरे परिवार को बधाई देते हुए कहा कि इस परिवार की प्रेरणा से हमने भी नेत्रदान का संकल्प लिया है।

मजबूत गवाह भी फॉर्म भरने के दौरान डाला है कि परिवार के लोग प्रतिरोध न कर सकें। उन्होंने कहा कि मरणोपरांत भी मैं मेडिकल के बच्चों के लिए शिक्षक रहना चाहता हूं।


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उक्त अवसर पर विजय शंकर राय, डॉक्टर जय गोविंद दुबे, सामाजिक कार्यकर्ता रमेश यादव, गोपाल सिंह यादव, कुंभ नाथ जैसवाल, गुल्लू सिंह यादव, अवधेश त्रिपाठी, प्रोफेसर श्रीकांत पांडे, जनार्दन सिंह सर्वोदय, सेवानिवृत्त डीपीआरओ अंबिका सिंह, पूर्व प्राचार्य डाक्टर ओमप्रकाश तिवारी, भाजपा नेता रामराज बनवासी, भूतपूर्व सैनिक आशीष कुमार सिंह राजू एवं वरिष्ठ अधिवक्ता श्रीकांत तिवारी आदि ने अपने विचार व्यक्त किया।

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द सर्जिकल न्यूज़ डेस्क

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