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गाजीपुरताजातरीन

कर्मचारी दो-दो हाथ करने को तैयार

जिला संयोजक बालेन्द्र त्रिपाठी ने अधिक से अधिक संख्या में जिला पंचायत सभागार में पहुंचने की अपील की।

गाजीपुर: महासंघ के प्रांतीय नेतृत्व और प्रदेशाध्यक्ष रामलाल यादव के आहवान पर जिला इकाई का चुनाव और पुनर्गठन करने के लिए कर्मचारी सक्रिय हो गए हैं।

बुधवार को विभिन्न कार्यालयों का भ्रमण कर 13 जनवरी को आयोजित अधिवेशन को सफल बनाने की रणनीति बनाई गई। जिला संयोजक बालेन्द्र त्रिपाठी ने अधिक से अधिक संख्या में जिला पंचायत सभागार में पहुंचने की अपील की।


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श्री त्रिपाठी ने कहा कि अपनी जायज मांगों को सरकार से लेकर ही रहेंगे। चाहे उसके लिए कितना भी संघर्ष करना पड़े। उन्होंने आह्वान किया कि किसी से डरने की आवश्यकता नहीं है क्योंकि पूरे प्रदेश में हमारे फेडरेशन की स्थिति काफी मजबूत है।

सरकार अपनी हठ धर्मिता को छोड़ कर्मचारियों की जायज मांगों को पूरा करें। पुरानी पेंशन बहाली, राज्य कर्मचारियों को केंद्र के समान भत्ते, पं. दीनदयाल उपाध्याय कर्मचारी कैशलेस चिकित्सा योजना, वेतन विसंगतियों आदि के निस्तारण के लिए सीएम को ज्ञापन भेजा गया था। सरकार द्वारा अभी तक कोई कार्यवाही न होने से कर्मचारियों में रोष व्याप्त है।

बुधवार को आईटीआई, उद्यान, कृषि, पीडब्लूडी आदि कार्यालयों मे भ्रमण टीम में बालेन्द्र कुमार त्रिपाठी, संजय यादव, अनिल त्रिपाठी, राम निवास, रमेश यादव, शाहनी, दीपक कुमार, कालिका यादव, रमाशंकर यादव, अरविन्द यादव, बृजेश राय, अंजय श्रीवास्तव आदि शामिल रहे।


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प्रतिशोध की भावना से कर्मचारी होते प्रताड़ित

राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता व प्रतिशोध की भावना से ग्रस्त होकर कर्मचारी एक-दूसरे को ही प्रताड़ित करते हैं। सत्ता परिवर्तन के साथ गिरगिटों की तरह रंग बदलना ही प्रदेश के अधिकांश कर्मचारी संगठनों के नेतृत्व का मूल उद्देश्य बन चुका है, जो कि प्रदेश के लाखों कर्मचारियों के हितों के साथ खिलवाड़ है।

व्यक्तिगत स्वार्थी हितों की पूर्ति के लिए करते जी-हुजूरी

प्रदेश के अधिकांश कर्मचारी संगठनों का शीर्ष नेतृत्व सत्तापक्ष द्वारा कर्मचारी विरोधी निर्णयों की आलोचना के स्थान पर अपने व्यक्तिगत स्वार्थी हितों की पूर्ति हेतु सरकार व प्रशासन को इन निर्णयों के क्रियान्वयन हेतु अपनी सहमति प्रदान करते हैं।

वर्तमान में इन संगठनों में राजनीतिक हस्तक्षेप समस्त कर्मचारी सगंठनों की मूल स्वायत्तता के लिए घातक है, जिस कारण इन संगठनों का संगठनात्मक ढांचा खोखला एवं नेतृत्व दिन प्रतिदिन पंगु व असहाय होता जा रहा है।


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बेरोजगार युवाओं के हितों के साथ खिलवाड़

सामाजिक दायित्व एवं सरोकारों से इन सगंठनों के विमुख होने के कारण स्वास्थ्य, शिक्षा व अन्य रोजगार के साधनों के निजीकरण के मार्ग को प्रशस्त करने में प्रमुख कारक की भूमिका का निर्वहन कर रही है, जोकि प्रदेश के लाखों बेरोजगार युवाओं के हितों के साथ खिलवाड़ है।

वर्तमान में प्रदेश के अधिकांश सरकारी कर्मचारी संगठन मात्र राजनेताओं एवं सत्तापक्ष की कठपुतली बनकर, कर्मचारी संगठनों के गठन के मूल उद्देश्य, जिसमें सरकार व कर्मचारी संगठनों के मध्य परस्पर संघर्ष की मूल प्रवृत्ति को तिलांजलि दे चुके हैं।

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द सर्जिकल न्यूज़ डेस्क

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