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संपादकीय: सिबगतुल्लाह अंसारी के समाजवादी पार्टी में शामिल होने से यूपी में सियासत गर्मायी

संपादकीय (चन्दन शर्मा): शनिवार को मुख्तार अंसारी के बड़े भाई सिबगतुल्लाह अंसारी ने अपने बेटे मन्नू अंसारी के साथ समाजवादी पार्टी की पुनः सदस्यता ले ली। समाजवादी पार्टी में यह उनकी तीसरी बार सदस्यता है।

सपा के नेताओं का लगातार बयान आ रहा है कि सिबगतुल्लाह के आने से सपा मजबूत होगी। ऐसा बयान इसलिए आ रहा है कि पूर्वांचल में मुस्लिम वोटों की संख्या बड़ी है। इसके अलावा सपा सरकार में मंत्री रहे अम्बिका चौधरी ने भी पार्टी की सदस्यता बसपा को छोड़कर ले ली।

अम्बिका चौधरी के बेटे आनंद चौधरी ने पहले ही समाजवादी पार्टी की सदस्यता ले ली थी जिसके बाद पंचायत चुनाव में समाजवादी पार्टी के ही टिकट पर बलिया जिला पंचायत की कुर्सी पर नौ वोटों से जीत कर विराजमान हुए।

उधर सपा से बलिया के सांसद प्रत्याशी रहे सनातन पांडे भी सदस्यता कार्यक्रम में दिखे। लेकिन जो नहीं दिखी वह थी अखिलेश यादव की खुशी। हमेशा की तरह प्रेस कांफ्रेंस में अखिलेश यादव खुश नजर नहीं आये। यूं कहें तो चेहरे पर सिबगतुल्लाह अंसारी को सपा में लाने के बाद डिफेंड करने की चिंता साफ नजर आ रही थी और यह चिंता जायज भी है।

मुख्तार अंसारी और अफजाल अंसारी के भाई और मोहम्मदाबाद सीट से विधायक रहे सिबगतुल्लाह अंसारी
मुख्तार अंसारी और अफजाल अंसारी के भाई और मोहम्मदाबाद सीट से विधायक रहे सिबगतुल्लाह अंसारी

सिबगतुल्लाह अंसारी के सपा में शामिल होते ही सियासी आरोप प्रत्यारोप शुरू हो गए और यूपी की सियासत गर्मा गयी।सियासी गलियारों में खूब चर्चे शुरू हो गए। सूत्रों के अनुसार सिबगतुल्लाह अंसारी अपने साथ लगभग 50 ग्राम प्रधानों का समर्थन लेकर लखनऊ पहुंचे थे और अब माना जा रहा है कि सिबगतुल्लाह एकबार फिर से मोहम्मदाबाद विधानसभा की सीट पर सपा के प्रत्याशी होंगे। हालांकि अभी बहुत समय है और यह सियासत है। ऐन वक्त पर कौन कहाँ से कहाँ चला जाये किसका टिकट कट जाए किसको दे दिया जाए यह कहना बहुत मुश्किल है।

पिछली बार विधानसभा चुनाव से पहले जब मुख्तार और उनके परिवार को पार्टी में शामिल करने की बात आई तो अखिलेश डंट गए थे और शिवपाल यादव के लाख प्रयास के बाद भी अखिलेश यादव ने इन लोगों को पार्टी में शामिल नहीं किया था। जिसके बाद शिवपाल यादव भी खासे नाराज हो गए और समाजवादी पार्टी दो टुकड़ों में बंट गयी थी। जिसका फायदा भाजपा को मिला और एक लंबे समय बाद भाजपा की सत्ता में पूर्ण बहुमत के साथ जबरदस्त वापसी हुयी।

भाजपा को अब बैठे बिठाये समाजवादी पार्टी के खिलाफ मुद्दा मिल गया है। भाजपा लगातार आरोप लगा रही है कि समाजवादी पार्टी को सत्ता के लिए गुंडों से कोई परहेज नहीं है। सरकार वैसे भी मुख्तार और अफजाल के पीछे हाथ धोकर पड़ी हुई है। लेकिन सिबगतुल्लाह के सपा में जाने के बाद सबसे बड़ी चुनौती हो गयी है मोहम्मदाबाद की विधायकी की सीट।

स्व0 विधायक कृष्णानंद राय व वर्तमान विधायक अलका राय के पुत्र पीयूष राय
स्व0 विधायक कृष्णानंद राय व वर्तमान विधायक अलका राय के पुत्र पीयूष राय

उधर वर्तमान विधायक भाजपा की अलका राय है जो इस बार मोहम्मदाबाद से निर्वाचित हुयी हैं। चर्चाओं की माने तो इस बार मोहम्मदाबाद की सीट पर वह अपने बेटे पीयूष राय को उतारने वाली हैं। ऐसा इसलिए माना जा रहा है क्योंकि पंचायत चुनाव में स्थानीय भाजपा के द्वारा अवधेश राय को ब्लॉक प्रमुख पद की सीट जितवाने में पीयूष राय का बड़ा हाथ रहा है।

पीयूष ने ब्लॉक प्रमुख पद पर भांवरकोल और मोहम्मदाबाद सीट पर भाजपा को जितवाकर अपनी सियासत की कबिलियत पेश कर दी है। वहीं सपा की सेवा कर रहे राजेश राय पप्पू को एक बार फिर से झटका लग सकता है। राजेश राय पप्पू पूर्व में मोहम्मदाबाद सीट पर समाजवादी पार्टी द्वारा विधायक पद के उम्मीदवार रह चुके है ।

मोहम्मदाबाद सीट से सपा के पूर्व में प्रत्याशी रहे राजेश राय पप्पू
मोहम्मदाबाद सीट से सपा के पूर्व में प्रत्याशी रहे राजेश राय पप्पू

पिछले कुछ इंटरव्यू में राजेश राय पप्पू ने सिबगतुल्लाह अंसारी के सपा में शामिल होने को नकारा था। कहीं न कहीं उनके मन मे मोहम्मदाबाद की सीट को लेकर संशय रहा होगा। वहीं इस बार इस सीट पर भाजपा की अलका राय से नाराज होने के बाद जनता का मूड राजेश राय की तरफ घूमता हुआ नजर आ रहा था। क्योंकि दोनों ही प्रत्याशियों को जनता आजमा ही चुकी है।

कभी अंसारी बंधुओं के पास विधायकी होती थी तो कभी स्व0 कृष्णानंद राय के परिवार के पास। एकबार फिर से इस सीट पर जनता शंसय में आ गयी है। वहीं सूत्रों से खबर यह भी है कि मुस्लिम वोटों को देखते हुए सिबगतुल्लाह अंसारी को सपा के टिकट पर जहूराबाद विधानसभा से से लड़ाया जा सकता है। जहूराबाद विधानसभा में 27 हजार से अधिक मुस्लिम वोटों की संख्या है।

वर्तमान में जहूराबाद विधानसभा सीट पर सुहलदेव भारतीय समाज पार्टी के अध्यक्ष और भाजपा में कैबिनेट मंत्री रहे ओमप्रकाश राजभर विधायक हैं। वहीं समाजवादी पार्टी लगातार शिवपाल यादव को साथ जोड़ने को लेकर बयान देती रहती है। ऐसे में यदि शिवपाल यादव एकबार फिर पार्टी में वापस आ जाते हैं तो जहूराबाद की सीट पर टिकट वह अपनी चहेती सैय्यदा शादाब फातिमा को दिलाने की पूरी कोशिश करेंगे। शादाब फातिमा सपा सरकार में महिला कल्याण राज्य मंत्री रह चुकीं हैं।

जहूराबाद की पूर्व विधायक और सपा में महिला कल्याण मंत्री रही शादाब फातिमा
जहूराबाद की पूर्व विधायक और सपा में महिला कल्याण मंत्री रही शादाब फातिमा

ऐसा नहीं होगा तो यहां सिबगतुल्लाह अंसारी को तैयार करना भी बड़ी बात होगी। फिर क्या यदि बात नहीं बनी तो सिबगतुल्लाह को गाज़ीपुर सीट से लड़ाया जा सकता है क्योंकि वहां से इस वक़्त अफजाल अंसारी सांसद है और अपने भाई को जिताने के लिए वह प्रयास में कोई कोर कसर नहीं छोड़ेंगे।

लेकिन यदि सिबगतुल्लाह अंसारी को टिकट दे दिया जाता है मोहम्मदाबाद से तो लंबे समय से पार्टी के साथ रह रहे राजेश राय पप्पू के समर्थकों का वोट विरोध में पड़ जायेगा और वह भाजपा को अंदरखाने से ही सही वोटिंग करेंगे।

यदि ऐसा हुआ तो सपा को मोहम्मदाबाद सीट को जीतना एकबार फिर से मुश्किल हो जाएगा। खैर सियासत क्रिकेट की तरह है कब किसका विकेट गिर जाए पता नहीं चलता। अंतिम समय तक चमत्कार हो सकता है। चलिए हम भी देखते हैं आप सबके साथ खेल सियासत का।

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