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पीएम मोदी ने नए कृषि कानूनों को लिया वापस, जानिए राजनीतिक नफ़ा-नुक़सान

पीएम ने टीवी पर आकर नए कृषि कानूनों को वापस लेने का ऐलान कर दिया। लेकिन यह फैसला उनका तो नहीं लगता। यह उस थिंक टैंक का है जो योगी को मुख्यमंत्री बनाना चाहता है।

चन्दन शर्मा : 19 नवंबर शुक्रवार का दिन भारतीयों के लिए बहुत बड़ा दिन था। गुरुनानक जी का प्रकाशोत्सव था लेकिन यह दिन प्रकाशोत्सव की वजह से नहीं बल्कि जाना जाएगा सरकार के झुकने के लिए, मोदी के माफी मांगने के लिए और माफी मांगने के साथ ही नए कृषि कानून वापस लेने के लिए। यह एक बड़ा कदम था।

वह नरेन्द्र मोदी जिसके समर्थक लगातार चाहते हैं कि मोदी ही जीवन पर्यंत प्रधानमंत्री रहें। वह मोदी जिनको उनके चाहने वाले भगवान मानने लगे हैं। वही मोदी जिनके हर कदम को कुछ मीडिया चैनल मास्टर स्ट्रोक बताते रहते है और लोगों का ब्रेन वाश करते रहते हैं।

वह मोदी टीवी पर 9 बजे आते हैं और सीधे कहते हैं। हमारी तपस्या में ही कोई कमी रह गयी होगी जिससे हम दीये के समान कृषि कानून के फायदे किसानों को नहीं बता सके। क्या यह हजम हो रहा है? वो भी तब जब पंजाब और यूपी में इलेक्शन सर पर है।

जब कृषि बिल आया तो शुरू से ही किसान संगठन जस बिल के विरोध में थे। विपक्ष भी समर्थन में आ गया। लेकिन सरकार ने इस बिल को कानून बना दिया। जिसके बाद किसानों की संघर्ष की कहानी शुरू हुई। किसान चल दिये धरना प्रदर्शन करने।

सरकार लाख कोशिशें करने लगी रोकने की लेकिन नहीं रुके। कुछ की जाने शुरू में ही चली गयी, कुछ की बीच में तो कुछ को मार दिया गया सरकारी मुलाजिमों द्वारा।

कहते हैं केन्द्र का रास्ता यूपी से होकर जाता है। ऐसे में केंद्र सरकार को डर हो गया था कि विधानसभा चुनावों में यदि यूपी में भाजपा हर गयी तो फिर क्या होगा नरेन्द्र मोदी का?

यदि आप ऐसा सोच रहे हैं तो गलत सोच रहे हैं। यह फैसला असल मे केन्द्र सरकार या नरेन्द्र मोदी का है ही नहीं। याद कीजिये वो वक़्त जब यूपी में भाजपा को प्रचंड बहुमत से जीत मिली थी और मुख्यमंत्री चेहरों का आंकलन किया जा रहा था।

उस वक़्त गाज़ीपुर के मनोज सिन्हा को मुख्यमंत्री बनाने की कवायद लगभग केंद्र की तरफ से शुरू हो गई थी क्योंकि मनोज सिन्हा मोदी के करीबी हैं अटल के नजदीक थे। लेकिन अंत मे फैसला बदल और मुख्यमंत्री बनने के लिए विशेष विमान से योगी को ले जाया गया और योगी हुए मुख्यमंत्री।

यूपी चुनाव में जिस तरह अखिलेश यादव पूरे विपक्ष को जोड़ रहे हैं छोटे-छोटे दलों को एक साथ ला रहे हैं यह बीजेपी थिंक टैंक को खतरा लगा।

पश्चिम उत्तर प्रदेश में लोग कांग्रेस को धीरे-धीरे प्रियंका के आने के बाद पसंद करने लगे थे और झुकाव भी लोगों का शुरू हो गया था। प्रियंका ने भी महिलाओं को 40% टिकट देने की घोषणा करके खलबली मचा दी। बाकी राकेश टिकैत भी यूपी पश्चिम से ही आते हैं।

इधर पूर्वांचल में अखिलेश ने कई पटरियों से गठबंधन किया जिसमें ओमप्रकाश राजभर के वजह से बीजेपी को खतरा नजर आया। क्योंकि पिछड़ों में राजभरों की संख्या बहुत अधिक है और अखिलेश के साथ राजभर लगातार जन संपर्क भी कर रहे हैं। इन समीकरणों में बीजेपी बैकफुट पर थी। चुनाव में पीछे धकेली जा चुकी थी।

इसी वक्त योगी को प्रधानमंत्री बनाने की चाह में कृषि कानून को वापस लेना पड़ गया। इसका फायदा भाजपा को यह हुआ कि अब एक अहम मुद्दा विपक्ष से भाजपा ने छीन लिया तो वहीं अपनी सीटों की संख्या में बीजेपी ने इज़ाफ़ा कर लिया है।

हालांकि अभी समय है क्योंकि अभी राकेश टिकैत ने आंदोलन वापस लेने से मना कर दिया है और कहा है कि पूरी तरह कानून वापस होने पर ही हम आंदोलन खत्म करेंगे। लेकिन अभी देखना यह भी है कि उन किसानों के साथ कितना न्याय होता है जिन्होंने इस आंदोलन में अपनी जानें गवां दी।

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